धर्म परिवर्तन कर इस्लाम या ईसाई धर्म अपनाने वाले दलितों को नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ


धाकड़ खबर | 13 Feb 2021|   644

New Delhi : धर्म परिवर्तन कर इस्लाम या ईसाई धर्म अपनाने वाले दलित अनुसूचित जाति (एससी)  के व्यक्ति आरक्षित सीटों से चुनाव नहीं लड़ सकते हैं. केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के जवाब में यह जानकारी दी. कानून मंत्री ने बताया कि ऐसे लोग अनुसूचित जाति को मिलने वाले आरक्षण का भी फायदा नहीं उठा सकते हैं, हालांकि हिंदू , सिख या बौद्ध धर्म को मानने वाले दलित अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ सकते हैं और आरक्षण का लाभ ले सकते हैं.

रविशंकर प्रसाद ने राज्यसभा में भाजपा (बीजेपी) सांसद जीवीएल नरसिम्हा राव के द्वारा आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र में पात्रता के सवाल पर पूछे गए प्रश्नों के जवाब में यह जानकारी दी. आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों के सवाल पर कानून मंत्री ने बताया कि संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश का पैरा 3 अनुसूचित जातियों की राज्यवार सूची को परिभाषित करता है. इसके अंतर्गत कोई व्यक्ति जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म से अलग मानता है, अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं समझा जाएगा. वैद्य अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र के साथ कोई भी व्यक्ति आरक्षित स्थानों से चुनाव लड़ने के लिए योग्य है.

 

लोक प्रतिनिधियों की निर्वाचन नियमावली में किसी संशोधन का प्रस्ताव नहीं

राव ने सरकार से यह भी सवाल पूछा कि क्या सरकार लोक प्रतिनिधियों का निर्वाचन नियमावली में किसी संशोधन पर विचार कर रही है जिसमें यह स्पष्ट रूप से उल्लेख हो की ईसाई या इस्लाम धर्म में धर्म परिवर्तन करने वाले दलित आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ने के योग्य नहीं है. इस पर सरकार ने जवाब दिया कि नहीं फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है.

लोक प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 4 (क) के अनुसार राज्य में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित स्थान की दशा में संसद का चुनाव लड़ने के लिए वह उस राज्य की या किसी अन्य राज्य की अनुसूचित जातियों में से किसी सदस्य होगा. वही धारा 5 (क) के अनुसार राज्य में आरक्षित सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए राज्य की किसी अनुसूचित जाति का सदस्य होना अनिवार्य है.


add

अन्य ख़बरें

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10
Beautiful cake stands from Ellementry

Ellementry