भाईचारे और गंगा-जमुना तहजीब की एक जीती-जागती मिसाल 


धाकड़ खबर | 10 Nov 2019|   32


सागर। शहर में कई धार्मिक स्थल ऐसे हैं जो हमे एक साथ मिलकर रहने का संदेश देते हैं और यहां आज भी सभी धर्म के लोग एक-साथ पूजन और इबादत कर आपसी भाईचारे को बनाए रखकर देश की एकता को प्रदर्शित कर रहे हैं। पीली कोठी दरगाह हिंदू-मुस्लिम भाईचारे और गंगा-जमुना तहजीब की एक जीती-जागती मिसाल है। यहां हिंदू-मुस्लिम भाई हर दिन मिलकर सजदा और इबादत करते हैं। मोहर्रम के दौरान पीली कोठी वाले बाबा की सवारी वर्षों से एक हिंदू परिवार को आ रही है। तहसीली निवासी मदन यादव को वर्ष 1978 से पीली कोठी वाले बाबा की सवारी आती है। वहीं नवरात्र के दौरान कई श्रद्धालु कालीजी के मंदिरों के साथ ही बाबा साहब की दरगाह पर भी शेर नृत्य करने पहुंचते हैं। दीपावली में यहां दीपक भी जलाए जाते हैं। दरगाह में हिंदू-मुस्लिम भाई मिलकर सभी व्यवस्थाएं संभालते हैं जो भाईचारे का संदेश है। 
दरअसल, अयोध्या फैसले के बाद शहर में भाईचारे की जीत हुई है। बुंदेलखंड के सागर जिले में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई हमेशा ही हर त्योहार, हर खुशियां साथ-साथ मनाकर प्रेम और आपसी सौहार्द का संदेश देते आ रहे हैं। शहर में कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जहां सागरवासी पूजा और इबादत एक साथ मिलकर करते आ रहे हैं तो कई जगह व्यवस्थाएं संभाल रहे हैं।
लगभग 50 साल से अधिक समय से यहां दोनों धर्मों के पूजा स्थल हैं। मंदिर में दर्शनों के लिए आने वाले कई श्रद्धालु माता जगत जननी के साथ-साथ यहां बनी मजार में भी अगरबत्ती और फूल अर्पित करते हैं। वहीं कई मुस्लिम भाई भी यहां इबादत करने पहुंचते हैं। सुबह-शाम कई बार ऐसा मौका आता है जब एक साथ हिंदू-मुस्लिम भाई यहां पूजा और इबादत करते हुए नजर आते हैं। एक ही बाउंड्री के अंदर एक ही चबूतरे पर विराजमान मंदिर और मजार शहरवासियों को हमेशा मिलकर रहने का संदेश देते आ रहे हैं। म्युनिसिपल स्कूल परिसर में एक ही चबूतरे पर बने मंदिर और मजार हिंदू-मुस्लिम भाइयों एकता की एक और मिसाल है। यहां हर दिन हिंदू-मुस्लिम भाई साथ में पूजा और इबादत करते हैं।